Sunday, February 22, 2009

एक अनोखा सफर.....



यूं शुरू हुआ मेरा अनोखा सफर...

ज़िन्दगी से हार कर ,दुनिया भुलाकर...

समुन्दर में चला मैं मेरी कश्ती लेकर..

पता न था जाना है किधर ...

चल पड़ी कसती फिजा ने रुख मोडा जिधेर...

सितारों की चादर ऊदे आया वोह चाँद नज़र..

ख्वाबों क शामियाने में सो रहा था बेखबर...

दिल कंप उठा मेरा जब आया वोह तूफ़ान का कहर...

छेड़ने लगी मेरी कश्ती को लहर हर लहर...

बच तोह गया उस खातार्नाख महूल से..

पर बच न सका जज्बातून क तूफ़ान से.

यादें कर देती थी अक्सर आँखें नम...

सोंचा था जाने कभ होगा यह सफर ख़तम...

दिल रो उठा मेरा और पूछने लगा समुंदर से जियु या मरू?

जवाब न था इस समुन्दर क पास सवाल का हमारे..

अभ तोह गर्दिश में जा चुके थे..शायद सितारे भी हमारे..

डूब गई कश्ती जभ नाज्दीख थे किनारे..!!!!

- स्येद मोहम्मद असीम(फर्जद )

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